बच्चों पर न डालें उम्मीदों का बोझ यह एक बहुत ही विचारणीय और गंभीर विषय है। बचपन का खोता कोना यह कैसी दौड़ लगी है? एक बचपन की मासूम, अनगढ़ मिट्टी को हम शिक्षा की होड़ में जल्द ही सांचे में ढालने लगे हैं। फूलों की तरह खिलने वाले छोटे बच्चों को, जिनके दिन आंगनबाड़ी की अल्हड़ गपशप और प्ले स्कूल के खिलखिलाते खेल में बीतने चाहिए थे, उन्हें हम सीधे LKG और UKG की कक्षाओं के अनुशासन और गृहकार्य के नीचे दबा रहे हैं। आजकल, तीन-चार साल की उम्र में ही बच्चे किताबों के बस्ते का बोझ, परीक्षा की चिंता और अच्छे ग्रेड्स का तनाव महसूस करने लगते हैं। यह वह समय है जब उन्हें मिट्टी में हाथ डालने, तितलियों का पीछा करने, कहानियाँ सुनने और कल्पना की उड़ान भरने की ज़रूरत होती है। उनका दिमाग खेलने और अनुभवों से सीखने के लिए बना है, न कि अक्षर ज्ञान और अंकगणित के जबरन बोझ के लिए। जब बच्चे, खेल-खेल में सीखने की सहज प्रक्रिया से वंचित हो जाते हैं, तो उनका बचपन खो जाता है। शिक्षा ज़रूरी है, पर बचपन की कीमत पर नहीं। हमें याद रखना होगा कि एक मजबूत नींव के लिए बच्चे का शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास संतुलित होना चा...
www.csconlinework.co.in दिसंबर 2021 में कोरोना काल में एनसीआर में भवन निर्माण की मजदूरी कॉपी में 4 किस्त एक ₹1000 की आई है स्टेटस देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें labour kapi majduri kapi 4 kist installment 1000 rupe https://hrylabour.gov.in/BocwDistrictDBTStatus मजदूरी कापी पर पहली कक्षा से स्नातकोत्तर डिग्री डिप्लोमा करने वाले सभी बच्चों के लिए स्कॉलरशिप के फॉर्म अप्लाई होना शुरू हो गए हैं Objective of the Scheme / इस योजना का उद्देश्य पंजीकृत कामगारों के बच्चों को पहली कक्षा से डिप्लोमा, डिग्री, स्नातक एवं स्नात्कोतर आदि कक्षाओं तक 8,000/- रूपये से 20,000/- रूपये तक की वार्षिक वित्तीय सहायता दी जाती है। छात्रवृति योजना के अंतर्गत दी जाने वाली कक्षावार राशि निम्न प्रकार से हैः- क्र.सं. श्रेणी का नाम दी जाने वाली राशि 1. प्राथमिक शिक्षा (1 से 8वीं कक्षा) 8000/-रू प्रति वर्ष 2. सैकण्डरी शिक्षा (9 से 12 वी कक्षा)/आई.टी.आई. कोर्स 1 0000/- रूपए प्रति वर्ष 3. उच्चतर शिक्षा (स्नातक डिग्री...
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